Computer kya he? जानिए हिंदी भाषा मे जानकारी

आधुनिक युग का हमारा सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी आविष्कार Computer की उपलब्धी होना है, जिसने हमारे समाज, शिक्षण, व्यापार ओर विज्ञान को एक नई दिशा दी है. जिसके माध्यम से आधुनिक जीवन के सभी पहलुओं में सुधार और समृद्धि उभरती हुई देखी जा सकती है. आज के युग में Computer हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है, यह न तो केवल गणना और डेटा प्रोसेसिंग के लिए उपयोगी है, बल्कि हमारे जीवन मे नए दृष्टिकोण को उपलब्ध करवाने के लिए जरुरी और सुनहरे भविष्य की रूपरेखा को बेहतर बनाने के लिए भी सार्थक होता हुआ नज़र आ रहा हे. इसका उपयोग हमारे रोजमरोज के कार्यों से लेकर ज्ञान, व्यवसाय, शिक्षा, और विज्ञान में व्यापक रूप मे हर बड़े तकनीकी और सामाजिक क्षेत्रों में हो रहा है. Computer आजके हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है, फिर भी बहुत से लोगों के लिए यह सवाल आज भी रहता है, Computer kya he?” इस ब्लॉग पोस्ट मे, हम Computer की परिभाषा, इतिहास, उपकरणों, सॉफ़्टवेयर और उनके उपयोग जेसे विभिन्न पहलुओं पर हिन्दी भाषा मे गहरा अध्ययन करेंगे.

कंप्यूटर का परिचय

ये एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो मुख्यरूप से डेटा प्रोसेसिंग करने के लिए डिज़ाइन कई गई है. इसमें कंप्यूटर के दो मुख्य पार्ट्स, हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर का संयोजन होता है जो मिलकर हमें विभिन्न कार्यों की गतिविधियों को आसान और तेजी से पूर्ण करने की सुविधा प्रदान करते है.  

कंप्यूटर की परिभाषा क्या हे? (What is the definition of computer?)

कंप्यूटर को सामान्य तोरपे एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो डेटा को प्रोसेस करने, उसे प्रसंस्कृत करने एवं उसे संग्रहित करने, और उससे जुड़े तकनीकी कार्यों को पूर्ण करने में सहायकरूप  होता है। यह इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस गणना और तकनीकी क्षमताओं के साथ संज्ञानात्मक रूप से सुसज्जित होता है और विभिन्न कार्यों को बहोत तेजी से और सहजता से स्वतंत्रता से या मानव निर्देशन में करने की क्षमता रखता हे. अंग्रेजी शब्द Compute’ से आये इस डिवाइस का अर्थ ‘गणना करना’ होता है.

कंप्यूटर का इतिहास: (History of Computer in Hindi)

कंप्यूटर का इतिहास विज्ञान और तकनीक क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण युग की शुरुआत को दिखाता है, प्राचीन कंप्यूटर डिवाइस से लेकर आधुनिक कंप्यूटरों के सफर की कुछ घटनाओं का हम नीचें वर्णन करेंगे जो समय के साथ मानव सभ्यता का तकनिकी क्षेत्र मे अग्रसर होनेका दिशासुचन करती हे.

प्राचीन काल का सबसे पहला गणना यंत्र अबाकस (Abacus) था जिसका मुख्य उपयोग गिनती करने के लिए किया जाता था और जो प्राचीन ग्रीक और चीनी सभ्यताओं में काफी प्रचलित हुआ करता था.

उसके बाद मध्यकालीन काल मे वर्ष 1642 में ब्लेज पैस्कल नामक व्यक्ति ने पहला मैकेनिकल कैलकुलेटर बनाया जिसे पंचांग (Pascal’s Calculator) नाम से जाना गया. उपरांत वर्ष 1837 मे चार्ल्स बैबेज नामक  ने आनुष्ठानिक गणना के लिए एक आविष्कार डिज़ाइन किया, जिसे अनालिटिकल इंजन (Analytical Engine) नाम से जाना गया.

कंप्यूटरो के विकास की असली शरुआत 20वीं सदी मे हुई थी कहेगे तो गलत नहीं होगा क्योंकि आधुनिक कंप्यूटर के जनक कहे जाने वाला पहला प्रथम इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर जिसका नाम एनियाक (ENIAC: इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटर एंड कंप्यूटर) रखा गया था उसे साल 1946 में अमेरिका में बनाया गया था.

इंटरनेट का आविष्कार होना: आरपीए नेटवर्क के रूप में साल 1969 में पहला इंटरनेट कनेक्ट हुआ, जिससे विज्ञान और तकनिकी क्षेत्रों मे विकास का एक नया युग शुरू हुआ. उसके बाद साल 1970 और 1980 के दशकों में पर्सनल कंप्यूटर (Personal Computer)का अविष्कार हुआ जो घरों और कार्यालयों में उपयोग मे लेने के लिए आम बात हो गया.

कंप्यूटर के प्रकार (Types of Computer)

पावर कैपसिटी और उनकी काम करने की अमता क्षमता के अनुसार कंप्यूटर भी अलग अलग प्रकार के होते हे जिसके बारे मे हम विस्तारसे जानेगे.

सुपरकंप्यूटर (Supercomputer):

सबसे ज्यादाशक्तिशाली कंप्यूटर के रूप मे सुपरकंप्यूटर की गणना होती हैं जो मुख्यत्वे बड़े और जटिल कामो को आसानी से हल करने के लिए डिज़ाइन किए गये हैं.

जिसकी गति, पावरऔर मेमोरी एक सामान्य कंप्यूटर की तुलना में बहुत अधिक होती है.

 उच्च क्षमता, और गति के चलते अधिकांशत: विज्ञान और अनुसंधान क्षेत्रों में ज्यादातर सुपरकंप्यूटर उपयोग मे लिए जाते है.

मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computer):

सौप्रथम 1950 के दशक में IBM (इंटरनेशनल बिज़नेस मॉडल) के द्वारा Mainframe computer का आविष्कार किया गया था.

Mainframe computer का आकार बहुत ही बड़ा होता है, इसको कोई भी ऑपरेटिंग सिस्टम मे run किया जा सकता है, उपरांत इसमें बहुत अधिक मात्रा में डेटा को भी स्टोर कर सकते है. 

इस कंप्यूटर के उपयोग से दूरसंचार (Tele communication) और बैंक क्षेत्रों के बड़े और जटिल कार्यों को बड़ी आसानी से कर सकते है.

पर्सनल कंप्यूटर (Personal Computer):

सामान्य तोर पे हम Personal Computer को शॉर्ट में PC  कहते हे. PC के आकार, डिजाइन तथा कार्यक्षमता की वजह से होम और ऑफिस में Personal कार्यो के लिए ये आमतोर पर ज्यादा उपयोग मे लिया जाता हे. डेस्कटॉप कंप्यूटर,  लैपटॉप और टैबलेट जेसे रोजाना उपयोग मे ले जाने वाली डिवाइसो को Personal Computer मे गिना जाता हे.

कंप्यूटर की संरचना के दो मुख्य आधारभूत पिलर

कंप्यूटर की संरचना के मुख्य दो आधार है. (१) हार्डवेयर (Hardware) और (२) सॉफ़्टवेयर (Software).हार्डवेयर कंप्यूटर का फिसिकल पार्ट्स (Physical parts) है। मुख्यत्वे माउस, कीबोर्ड,  मॉनिटर, सीपीयू,  माइक्रोचिप्स और हार्ड ड्राइव जैसी डिवाइसों के अंदरूनी हिस्से की गणना हार्डवेयर में की जाती है, जबकि सॉफ़्टवेयर विभिन्न प्रोग्राम्स और एप्लिकेशन्स को संचालित करने में आधारभूत सहायक होता है. सॉफ़्टवेयर वह चीज़ है जो हार्डवेयर को बताता है कि विभिन्न प्रोग्राम्स और एप्लिकेशन्स को संचालित करने के लिए क्या करना हे और कैसे करना है. आपके फ़ोन मे रहा कंप्यूटर प्रोग्राम और ऐप्स भी सॉफ़्टवेयर से ही संचालित होती  हैं. फोटो संपादक, वेब ब्राउज़र और वीडियो गेम  इसके ही कुछ सामान्य उदाहरण हैं.इनकी कार्यप्रणाली से देखा जाये तो हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर एक दूसरे से बिलकुल अलग हैं, लेकिन कार्य करने के लिए उन्हें एक दूसरे की आवश्यकता रहती है. उदाहरण के तोर पर स्मार्टफोन के माध्यम से समजा जाये तो यहा फोन की गणना हार्डवेयर के तोर पे होंगी और इनको संचालित करने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स की गणना सॉफ़्टवेयर मे होगी.

अगर सॉफ़्टवेयर को फोन मे से हटा दिया जाये तो, यह कॉल करने, टेक्स्ट करने, ऑनलाइन जाने मे या फिर अन्य किसी भी प्रोग्राम को ओपन करने मे सक्षम नहीं होगा क्योंकि बिना सोफ्टवेयर के ये कोई निर्देश ही प्राप्त नहीं कर सकेगा, ओर हमारा फ़ोन बिना काम का साधारण सा हो जायेगा. ये तो बात हो गयी फोन मे बिना सॉफ्टवेयर की, लेकिन अगर हमारे पास हार्डवेयर ही नहीं है, मतलब कोई फ़ोन ही नहीं है, उस वकत हमारा सॉफ्टवेयर की ऑपरेटिंग सिस्टम मे रहे निर्देशों को भेजने और उसे प्राप्त करने के लिए ऐसा कोए सक्षम फिसिकल डिवाइस नहीं हे तो फिर हमारा सॉफ्टवेयर भी बिना हार्डवेयर के बिनउपयोगी ही कहलायेगा.इस उदाहरण से हमें पता चलता हे कि हार्डवेयर को सॉफ़्टवेयर को क्या करना हे उसके चलते उसकी आवश्यकता होती है, ओर सॉफ़्टवेयर को अपने निर्देशों को कार्यरत करने के लिए हार्डवेयर की आवश्यकता रहती है. जब इन दोनों का संयोजन होता हे, तो फोन, कंप्यूटर, टेम्पलेट या किसी अन्य प्रकार के उपकरण का उपयोग करके भी हम सभी प्रकार के काम आसानी से कर सकते हे.

कंप्यूटर काम केसे करता है?  

 हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों का उपयोग कर के ही कंप्यूटर काम करता है. मुख्यत्वे कंप्यूटर को Input, Output  और Process संबंधित काम करने होते हे. यूजर के निर्देशों (इनपुट) के अनुसार परिणाम या आउटपुट का प्रदान करना कंप्यूटर का कार्य होता हैं.

कंप्यूटर के कार्यों को मुख्यत्वे 4 भागों में विभाजित किया गया हैं.

1. इनपुट डिवाइस (Input Device)

Process और Output जेसे कार्यों को करने के लिए निर्देश देने की आवश्यकता रहती हैं. बिना निर्देश दिए कंप्यूटर से हम कोई काम करवा नहीं सकते. उदाहरण के तोर पे देखा जाये तो कंप्यूटर में कुछ भी टाइप करने के लिए हमे Keyboard डिवाइस द्वारा कंप्यूटर को निर्देशित कर सकते हे की  हम क्या लिखना चाहते हैं.कंप्यूटर को निर्देशित करने की इसी कार्यप्रणाली को हम इनपुट कहते हैं, और कंप्यूटर को निर्देश देने के लिए हम जो भी डिवाइस का उपयोग करते हे उन्हें Input Devices कहते हैं. जैसे कि माउस , कीबोर्ड,  स्कैनर, माइक्रोफोन और टचपैड,  आदि.

2. आउटपुट डिवाइस (Output Device)

आउटपुट डिवाइस उसे कहा जाता हे जो कंप्यूटर प्रोग्राम से प्रोसेस किए गए डेटा को रिसीव करके उसे रिजल्ट के फॉर्म मे बदल देता हे.उस रिजल्ट डेटा को memory के फॉर्म मे सेव करके हम भविष्य मे कभी भी उसे उपयोग मे ले सकते है. उदाहरण के रूप मे देखा जाये तो कोई भी डॉक्यूमेंट फाइल को प्रिन्ट करने के लिए जब हम कंप्यूटर डिवाइस को कमांड करते हे तब हार्ड कॉपी के रूप मे उसका आउटपुट हमें प्रिन्टर से प्राप्त होता हे. मॉनिटर, प्रिन्टर, स्पीकर ओर प्रोजेक्टर की गिनती आउटपुट यूनिट मे होती है.

3. प्रोसेसिंग यूनिट (Processing Unit)

प्रोसेसिंग यूनिट की मदद से किसी भी प्रकार के डेटा को एक्सिस या प्रोसेस किया जाता है. कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण भाग जो कोई हे तो वो प्रोसेसिंग यूनिट है क्योंकि इसी यूनिट के अंदर डेटा प्रोसेसिंग उपरांत कंप्यूटर को दिए गए इनपुट पर भी निर्णय लेने का काम इसी यूनिट का होता है. इसलिए इस यूनिट को कंप्यूटर का ब्रेन (दिमाग) भी कहा जाता है. CPU, motherboard और memory का समावेश प्रोसेसिंग यूनिट मे होता है.

4. स्टोरेज डिवाइस (Storage Device)

Storage डिवाइस मतलब, एक ऐसा डिवाइस जिसमें कंप्यूटर प्रोग्राम में प्रोसेस किए गए सारे डेटा और इंफॉर्मेशन को सही सलामत लम्बे समय तक memory के फॉर्म मे स्टोर किया जा सकता है. USB, Pen Drive, Memory Card, Hard Disk ओर अन्य memory बेस्ड External Drives की गिनती Storage डिवाइस मे होती है.

कंप्यूटर के कितने भाग (components) होते है?

 कंप्यूटर डिवाइस मे बहोत सारे components होते हे, आज हम उनके नाम और उनकी कार्यप्रणाली के बारे मे जानेगे.

Motherboard: मधरबोर्ड

मदरबोर्ड कंप्यूटर का एक केंद्रीय संचार बैकबोन कनेक्टिविटी बिंदु है जो एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्ड हे. जिसे main printed circuit board (पीसीबी) से जाना जाता हे. Motherboard उससे जुड़े हार्डवेयर उपकरणों को आपस में एक स्थान पर जोड़ता है. देखा जाये तो Motherboard  का कंप्यूटर के सारे पार्ट्स के साथ directly  या indirectly  कनेक्शन होता है. कंप्यूटर की मुख्य प्रोसेसिंग गतिविधि इसी पर निर्भर होती है. बिना इसके, कंप्यूटर का कोई भी डिवाइस, जैसे की सीपीयू, जीपीयू, या फिर हार्ड ड्राइव, एक दुसरे से इंटरैक्ट ही नहीं कर सकते. कंप्यूटर प्रोग्राम की कार्यप्रणाली को गतिशीलता से काम करने के लिए मदरबोर्ड कि संपूर्ण कार्यक्षमता होना अनिवार्य है. 

CPU: सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट

CPU का पूरा नाम Central Processing Unit है. CPU को Processor के नाम से भी जाना जाता हे, ओर उसे motherboard मे पाया जाता है.  इसे कंप्यूटर सिस्टम का दिमाग भी कहा जाता हे क्योंकि हे human Brain कि तरह सारे दिए गए निर्देशों का सही से समाधान करता हे. CPU एक इलेक्ट्रिक माइक्रो चिप्स के फॉर्म मे होता हे जो यूजर्स द्वारा दिए गए सारे निर्देशों पर प्रोसेसिंग करके उसे उपयोगी इन्फोर्मेशन मे रूप मे बदल देता हे, उपरांत कंप्यूटर प्रोग्राम के सारे कार्यो को अपनी कार्यप्रणाली से अच्छे से नियंत्रित करता हे.

RAM

RAM का पूरा नाम Random Access Memory हे.  RAM एक हार्डवेयर डिवाइस हे, जो कंप्यूटर के motherboard मे देखी जा सकती हे जो कम्प्यूटर की अस्थाई मेमोरी होती है।.  जब तक हमारा  कंप्यूटर स्टार्ट है यह मेमोरी काम करती रहती है और इसमें डेटा  और इनफार्मेशन स्टोर रहती है. जब कभी कंप्यूटर में हम सॉफ्टवेर ओपन करते है तो वो RAM में ही आटोमेटिक स्टोर हो जाते  है.  रैम या रैण्डम एक्सेस मेमोरी कम्प्यूटर की अस्थाई मेमोरी होती है। की-बोर्ड या अन्य किसी भी  इनपुट डिवाइस से इनपुट किया गया डाटा, प्रोसेसिंग से पहले  सौप्रथम रैम (RAM) में स्टोर होता है और  फिर बाद मे CPU  द्वारा उनकी आवश्यकतानुसार वहाँ से एक्सेस किया जाता है। कंप्यूटर  जब भी कुछ प्रोग्रामिंग करता हैं तब  उसके रिजल्ट अस्थायी रूप से RAM में स्टोर  हो जाते  हैं.यूजर्स द्वारा  दिए गए निर्देशों को CPU के पास भेजना यही RAM का मुख्य कार्य  होता हे.  इसी प्राइमरी कार्य के चलते RAM को CPU की primary memory या  फिर CPU का  personal assistant भी कहा जाता है. RAM को मुख्यत्वे megabytes (MB) or gigabytes (GB) में मापा जाता हैं. जितना ज्यादा RAM होगा उतनी कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग करने कि स्पीड बहेतरीन होगी.

Hard Drive (हार्ड ड्राइव)

हार्ड ड्राइव और  एक प्रकार की इलेक्ट्रोमैकेनिकल डेटा स्टोरेज डिवाइस है, जिसे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग को सेव करने की primary डिवाइस माना जाता हे. Hard Drive ऑपरेटिंग सिस्टम को संग्रहीत करता हे, जो कंप्यूटर को चलाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, साथ ही स्टोरेज के माध्यम से एप्लिकेशन और डेटा फ़ाइलें भी संग्रहीत करता है. जिसका उपयोग लैपटॉप और डेस्कटॉप दोनों प्रकार के कंप्यूटर में किया जाता है.हार्ड ड्राइव में कैश मेमोरी होती है, जो हार्ड डिस्क के आंतरिक स्टोरेज और बाहरी इंटरफ़ेस के बीच एक बफर का काम करती हे. Hard Drive एक “गैर-वाष्पशील” स्टोरेज ड्राइव है, जिसका मतलब है कि यह डिवाइस बिना बिजली की आपूर्ति न होने पर भी संग्रहीत डेटा को बनाए रखने मे सक्षम हे.इस समय मे हमारे कंप्यूटर  मे SSD (सॉलिड-स्टेट ड्राइव) और HDD (हार्ड डिस्क ड्राइव) प्रकार की डेटा स्टोरेज डिवाइस उपयोग किया जाता है.

Power Supply Unit (पावर सप्लाई यूनिट)

पावर सप्लाई  यूनिटएक आंतरिक हार्डवेयर उपकरण है, जो Cases के एक कोने मे धातु बॉक्स के फॉर्म मे पाया जाता  है. जो AC पॉवर को DC पॉवर में परिवर्तित करके, फिर इसे कंप्यूटर के बाकी हिस्सों में जरुरत के अनुसार वितरित करता है. डेस्कटॉप कंप्यूटर पर, पीएसयू की जगह वहा हे जहां पर पावर कॉर्ड प्लग होता है, और तकनिकी तौर पर इसमें इनबिल्ट एक I/O पावर स्विच होता है.

Expansion card: (एक्सपेनशन कार्ड) 

Expansion card को अडेपटर कार्ड (Adapter card) के नाम से भी जाना जाता है, कंप्यूटर के motherboard पर एक (एक्सपेंशन) स्लॉट में इन्हें इन्सर्ट किया जाता है. ये एक electronic card/ circuit board हे जो की कम्प्युटर की क्षमता को बढ़ाने के लिए और उसके कार्यप्रणाली की गतिशीलता को  बेहतर बनाने के लिए उपयोग मे लिये जाते है.आज कल आसानी से हटने वाले भी कार्ड भी आते हैं जिनहे हम पोर्ट में अपनी जरुरत के अनुसार कभी भी हटा और लगा सकते हैं कम्प्युटर सिस्टम कई अलग अलग तरह के कार्ड इस्तेमाल होते हैं,  ऐसे कुछ जरुरी कार्ड के बारे में हम विस्तार से जानते हैं.

नेटवर्क कार्ड: (Network card)

Network card को नेटवर्क अड़ेपटर (Network Adapter) ओर नेटवर्क इंटरफ़ेस कार्ड (Network Interface card) के नाम से भी जाना जाता हे. ये कार्ड कम्प्युटर नेटवर्क को कम्प्युटर की सिस्टम के साथ इंटरनेट से जोड़ने और कम्प्युटरो के बीच संचार करने के काम में आता है.

विडियो कार्ड: (Video card)

Video card को ग्राफिक कार्ड ओर डिस्प्ले कार्ड के नाम से भी जाना जाता हैं. विडियो कार्ड इमेज और विडियो जैसे ग्राफिकल इंटरफ़ेस को सिस्टम में दिखाने का कार्य करता है ओर प्रोसेसिंग की मदद से परिणामजनक निर्देशों को ग्राफिक्स में बदल भी सकता है. विडीयो कार्ड के साथ एक अलग से ही प्रॉसेसर होता हे जो ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ जुड़कर मॉनिटर पर डिसप्ले दिखाने के काम आता है.

औडियो कार्ड: (Audio card)

Audio card को Sound card के नाम से भी जाना जाता हे. ये कार्ड ध्वनि के निर्देशोंको पाने के लिए  इलैक्ट्रिकल सिग्नल को औडियो सिग्नल में बदलने का काम करता है जिसकी वजह से हम  ध्वनि को सुन सकते हे. औडियो कार्ड में बहुत तरह के पोर्ट और जैक होते हैं, जिनकी मदद से हम हैडफोन, माइक्रोफोन और स्पीकर जैसे बाकी डिजिटल औडियो उपकरणो को जोड़ सकते हे.

कंप्यूटर का उपयोग

कंप्यूटर के जनक कहे जाने वाले Charles Babbage के हम हमेशा आभारी रहेंगे क्योंकि इनकी एक शरुआती पहेल के चलते आज के इस डिजिटल युग मे कोई भी क्षेत्रों मे हमारा काम करना बहोत आसान हो गया हे. इस डिजिटल युग मे कंप्यूटर हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गया हे जिसका इस्तेमाल हम रोजबरोज के कामो के लिए  करते हे.आजकल देखा जाये तो शिक्षा के क्षेत्र में कंप्यूटर का उपयोग होना अब आम बात हो गया हे. ऑनलाइन शिक्षा और अनुसंधान के लिए ये बहोत जरुरी है. चिकित्सा के डॉक्टर कंप्यूटर की मदद  से अपने मरीजों के Health रिपोर्ट से उनकी सही से सारवार कर सकते हे, उपरांत कंप्यूटर के जरिए डॉक्टर कोआपातकालिन स्थिति में कम समय में निर्णय लेने में भी ये ज्यादा उपयोगी होता हे. कंप्यूटर मौसम सम्बंधी जानकारी एकत्रित करने के लिए, अंतरिक्ष सम्बंधी जानकारी प्राप्त करने, भूकंप का पता लगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। मैनुफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज में भी पावर प्लांट में टेम्परेचर और प्रेशर को रेगुलेट करने में भी इसकी जरुरत रहती हे. इसके अलावा संगीत क्षेत्र में, मनोरंजन के क्षेत्र में, बैंकिंग सेक्टर ओर सरकारी विभागो मे भी कंप्यूटर की बहोत जरूरियात रहती हे.

 निष्कर्ष:  कंप्यूटर क्या है?

हमने आपको computer kya he? उसके बारे मे हिन्दी भाषा मे बेसिक जानकारी प्रोवाइड करने की पूरी कोशिश की हे, जिससे की आप कंप्यूटर को आसान भाषामे बहोत आसानी से समज सके. इसके आलावा अगर कुछ ओर माहिती छुट रही हो तो आप हमें comment करके बता सकते हे, जिससे की हम इस ब्लॉग आर्टिकल को update करते वक्त उस topic को add कर सके.

Hindi Display वेबसाइट पर यह ब्लॉग पढ़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद

Team Hindi Display

 

Leave a Comment